#AnikulPoetry

“chāñd sā misra akelā hai mire kāġhaz par
chhat pe aa jaao mirā sher mukammal kar do”
Bashir Badr

बद्र की ये शायरी नज़रों पे अमल हुई,
दिल ने गुफ्तगू की और ये ग़ज़ल हुई,
बशीर ही जाने, कितनी मुकम्मल हुई !!

अनिकुल का बद्र को शुकराना

मुश्किल लफ़्ज़ों के मायने:

मिसरा: शेर का पहला वाक्य
मुकम्मल: पूरा हो जाना
महज़बीं: चांदनी
मौशिकी: संगीत (दर्द भरा )
पैबस्त: छाई हुई (चारो तरफ)
शब-ब-खैर: रात अच्छी गुजरे

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